दबंग रिपोर्ट पोहरी- कुलदीप बैरागी
समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है ठीक बैसे ही क्षेत्र में रोज बनते विगड़ते राजनीतिक समीकरणों से राजनीति के जानकार प्रत्याशीयों की हार जीत का गणित बैठा रहे हैं। क्षेत्र में हर गली-चैराहा और नुक्कड़ों पर सिर्फ चुनावी चर्चा ही सुनने को मिल रही है हर तरफ लोग अपने-अपने आंकड़ों के हिसाव से हार जीत का दावा करने में लगे हुऐ हैं। ऐसे में क्षेत्रीय विरोध और समर्थन के आधार पर प्रत्याशीयों के मतों को आंकने का सिलसिला भी लगातार जारी है।
सूत्रों की मानें तो पोहरी विद्यानसभा के लिये यह उपचुनाव पहला और ऐतिहासिक चुनाव साबित हो सकता है जिसमें चैकाने बाले परिणाम सामने आ सकते हैं। लेकिन फिलहाल क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार विद्यानसभा में भाजपा प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा का कई जगह कड़ा विरोध देखा जा रहा है तो बहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला भी इससे अछूते नहीं हैं। दोनों ही प्रत्याशी पिछले समय में पोहरी सीट पर विधायक रह चुके हैं जहां वे जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाये यह जनता बखूवी जानती है। यहां वताना लाजमी होगा कि पूर्व में कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला को भी पोहरी की आवाम ने अपना अमूल्य समर्थन देकर विधायक चुना था जिसके बाद हरिवल्लभ शुक्ला ने पोहरी में क्या किया क्या नहीं इस बात को आवाम भलीभांति जानती है इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा भी कांग्रेस के टिकिट पर पोहरी से चुनाव लड़े थे जिसमें आवाम के अपार समर्थन ने उन्हें पोहरी से विधायक चुना था लेकिन इसके बाद वे जनादेश को पैरों तले रोंद कर विधायक पद से अपना स्तीफा देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गये थे और अब वर्तमान में पुनः पोहरी सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जनसमर्थन मांग रहे हैं। लेकिन इस बीच उनका एक वर्षीय पूर्व कार्यकाल (वतौर विधायक) आवाम को सोचने पर मजबूर करता नजर आ रहा है हालांकि अपने कार्यकाल में कुछ न कर पाने का ठीकरा वे पहले ही प्रदेश की पूर्व कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर फोड़ चुके हैं। लेकिन कुछ चीजें अभी-भी वांकि हैं जिनको लेकर सुरेश राठखेड़ा को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
कुलमिलाकर पोहरी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे दोनों ही प्रमुख दलों के उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा (भाजपा) तथा हरिवल्लभ शुक्ला (कांग्रेस) पर जनता पहले भी अपना भरोसा दिखा चुकी है और दोनों ही प्रत्याशीयों की रग-रग से भी वाकिफ है ऐसे में इन दोनों प्रत्याशीयों के विरोध का लाभ अन्य को मिलना तय है।
Bsp ki Jeet pakki
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